Fri Sep 11, 2026 | 09:05 PM IST

चोट से नील पड़ जाने पर अपनाएं घरेलू उपाय

चोट लगने के कारण नील पड़ जाने पर आप कुछ आसान घरेलू नुस्‍खे घर बैठे अपना सकते हैं, आइए जानते हैं इनके बारे में

चोट लगने पर नील क्‍यों पड़ जाता है? चोट लगने पर अक्‍सर चोट वाले स्‍थान पर ब्‍लड क्‍लॉटिंग हो जाती है, यानी खून एक जगह इकट्ठा हो जाता है। इसी कारण स्‍क‍िन पर काले, लाल या नीले धब्‍बे नजर आते हैं ज‍िसे हम नील पड़ना कहते हैं। नील पड़ने पर दर्द होता है और उस जगह सूजन भी नजर आती है। नील पड़ने पर आप कुछ आसान घरेलू नुस्‍खों की मदद से इस समस्‍या से न‍िजात पा सकते हैं जैसे- एलोवेरा का इस्‍तेमाल, एसेंश‍ियल ऑयल लगाना आद‍ि। नील पड़ने पर आप हेल्‍दी डाइट की मदद से उसे ठीक कर सकते हैं। डाइट की मदद से घाव को जल्‍दी ठीक क‍िया जा सकता है। इस दौरान आप ज‍िंक से भरपूर भोजन का सेवन करें जैसे पालक। इसके अलावा आपको सारी हरी सब्‍ज‍ियां और फलों का सेवन करना चाह‍िए। नील पड़ने पर क‍िन अन्‍य घरेलू नुस्‍खों को अपना सकते हैं ये जानने के ल‍िए हमने लखनऊ के व‍िकास नगर में स्‍थित प्रांजल आयुर्वेद‍िक क्‍लीन‍िक के डॉ मनीष स‍िंह से बात की।

use alovera in bruises  

1. नील पड़ने पर लगाएं एलोवेरा (Use alovera to cure bruises)

नील पड़ने पर सबसे आसान नुस्‍खा है एलोवेरा का इस्‍तेमाल। अगर क‍िसी कारण आपको चोट लग गई हो और नील का न‍िशान पड़ा हो तो उसे ठीक करने के ल‍िए आप उस स्‍थान पर एलोवेरा लगा सकते हैं। एलोवेरा का इस्‍तेमाल करने के ल‍िए आपको एलोवेरा के पत्‍तों से जैल न‍िकालना है और चोट पर लगाना है, आप चाहें तो पत्‍ते को सीधा चोट पर भी लगा सकते हैं। एलोवेरा में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं, इससे दर्द और नील का न‍िशान हटाने में मदद म‍िलती है। 

 2. नील पड़ने पर इन चीजों का सेवन करें (Healthy diet to heal bruises)

eat pinapple to cure bruises

अगर आपके शरीर में नील पड़ गया है तो आप इन चीजों का सेवन करें, इससे आपकी बॉडी अंदर से हील होगी या अंदरूनी चोट का उपचार जल्‍द हो सकेगा- 

  • आप पाइनएप्‍पल (pineapple) खाएं। पाइनएप्‍पल में एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं ज‍िससे चोट के आसपास पड़े नील के न‍िशान ठीक हो जाएंगे। 
  • आप ऐसी चीजों का सेवन करें ज‍िसमें ज‍िंक मौजूद हो। ज‍िंक से शरीर के घाव जल्‍दी भरते हैं और ट‍िशू र‍िपेयर हो जाते हैं। ज‍िंक र‍िच फूड (zinc rich food) की बात करें तो उसमें पालक, कद्दू के बीज आद‍ि शाम‍िल हैं। 

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3. नील पड़ जाने पर इस्‍तेमाल करें एप्‍पल साइडर व‍िनेगर (Use apple cider vinegar to cure bruises)

एप्‍पल साइडर व‍िनेगर की मदद से आप नील पड़ने की समस्‍या से छुटकारा पा सकते हैं। सेब का स‍िरका इस्‍तेमाल करने के ल‍िए आधा कप पानी लें उसमें सेब के स‍िरके की कुछ बूंदें म‍िला दें फ‍िर हल्‍के हाथ से नील वाले स्‍थान पर इसे कॉटन की मदद से लगा दें, आपको जल्‍द आराम म‍िल जाएगा। सेब को अंदरूनी चोट के ऊपर वाली स्‍क‍िन पर लगाया जा सकता है पर अगर खून न‍िकल रहा हो तो डॉक्‍टर से सलाह लेकर ही इस नुस्‍खे का इस्‍तेमाल करें।

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4. नील पड़ने पर लगाएं रोज़मेरी ऑयल (Use rosemary oil to cure bruises)

essential oil rosemary

नील पड़ जाने पर क्‍या करें? चोट के कारण शरीर में नील पड़ जाने पर आप एसेंश‍ियल ऑयल (essential oil) की मदद भी ले सकते हैं। एस‍ेंश‍ियल ऑयल को आप क‍िसी कैर‍ियर ऑयल में म‍िलाकर लगाएं। अगर आपके पास कोई लोशन है तो उसमें म‍िक्‍स करके भी लगा सकते हैं। एस‍ेंश‍ियल ऑयल की मदद से आपको दर्द कम होता महसूस होगा और आराम म‍िलेगा। कोई कैर‍ियर ऑयल लें जैसे नार‍ियल का तेल और उसमें रोज़मेरी ऑयल म‍िक्‍स कर दें। आपको रोज़मेरी ऑयल की दो बूंद ही एड करनी है। आप रोज़मेरी की जगह लैवेंडर ऑयल भी इस्‍तेमाल कर सकते हैं। अगर आपको एसेंश‍ियल ऑयल से एलर्जी है तो दूसरे तरीके अपनाएं। 

चोट लगने पर नील पड़ने पर आप डॉक्‍टर को भी द‍िखा सकते हैं, वैसे तो नील दो से तीन द‍िन में ठीक हो जाता है पर अगर सूजन कम न हो तो च‍िकित्‍सा मदद लें। नील पड़ने पर आप उसे जगह कोई नुकीली चीज न लगाएं, इससे संक्रमण हो सकता है। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 14, 2021 00:00 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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